Tuesday, 30 September 2014

30 सितम्बर /अलविदा, बहुत याद आओगे तुम आॉरकुट


( L.S. Bisht ) - किसी का जिदगी मे आना हवा के ताजे झोंके की मानिंद खुशियों से सराबोर कर देता है । तुम्हारा आगमन लाखों युवा दिलों के लिए कुछ ऐसा ही रहा । देखते-देखते तुम सभी के चहेते बन गये । यह एक तरह से स्वाभाविक ही था । दर-असल बदल रहे सामाजिक परिवेश मे भारत जैसे विकासशील देश के युवाओं को ऐसे ही किसी दोस्त की चाहत थी जिसके साए तले वह उन सभी बातों को साझा कर सकें जिन्हें वे अभी तक नही कर सकते थे । आरकुट,  तुमने यह काम बखूबी किया । तुम उन सभी के दिल मे बस गये ।


समय गुजरता गया । लम्हा-लम्हा गुजरना ही समय की अपनी गति है, वह कभी किसी के लिए रूकता नही । फेसबुक नाम से आए एक नये दोस्त ने तुम्हारे चाहने वालों को अपने मोहपाश मे बांधना शुरू किया । विदाई के इन लम्हों मे, तुम्हें यह तो मानना ही पडेगा कि नये दोस्त मे कुछ खास था जो शायद तुम चाह कर भी न दे सके थे । आज तुम्हारे लाखों चाहने वाले इस फेसबुक के दोस्त हैं जो कभी तुम्हारे थे ।
लेकिन अपनी खूबसूरत युवा जिंदगी के जिन लम्हों को उन्होने तुम्हारे साथ गुजारा, साझा किया वह कभी भूले नहीं । और न ही कभी भूल पायेंगे । तुम्हारे समय की किशोरवय की दह्लीज् मे खडी वह पीढी आज पूरी तरह युवा हो चुकी है और जो युवा थे वह अब प्रौढावस्था की ओर धीरे-धीरे कदम बढा रही है । लेकिन एक जादू था तुम्हारा आरकुट वह सर चढ कर बोला ।

सच कहूं तो तुमने अपने दौर के किशोर व युवा दोस्तों को बहुत कुछ दिया है और उन्हें बहुत कुछ ऐसा सिखाया जिसकी कल्पना उस कालखंड मे संभव न थी । शर्मीले, सकुचाए स्कूल-कालेज के लाखों बच्चों को तुमने ही बोलना, लिखना और विचारों को साझा करना सिखाया । आज वही सब तो फेसबुक के दोस्त हैं । बहुत बेलौस और बिंदास । राजनीति की उठा-पटक हो या कि जिंदगी की रपटीली राहों के निजी एहसास, वह सबकुछ साझा करने लगे हैं । अंतरंग लम्हों की फोटो को भी देखने-दिखाने मे उन्हें कोइ परहेज नही । देश के सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक , सभी मुद्दों पर तुम्हारे वह दोस्त अपने परिपक्व विचारों को रखना सीख गये हैं । यह सब वह शायद न कर पाते अगर तुमने नींव न डाली  होती ।

एक बात और आरकुट । तुम्ही ने एक पूरी पीढी को प्यार करना, दोस्त बनाना और दोस्ती निभाना सिखाया । आज न जाने कितने तुमसे जुड कर उनसे जुड सके जिसके साथ वह जिंदगी के हमसफर बन गये । जो हम्सफर न बन सके, वह आज भी दोस्त हैं । सच तो यह है कि दोस्त , दोस्ती और युवा जिंदगी को तुमने ही नये तरीके से परिभाषित किया ।

तुम हमेशा के लिए उनकी जिंदगी से जा रहे हो, यह जानकर सभी शोक मे डूब गये । सभी को याद आ रहे हैं वह दिन जब वह तुम्हारे साथ थे । उन दिनों की ढेरों खूबसूरत यादों को वह सहेज कर रखना चाहते हैं । जैसा भी है तुम्हारा यूं जाना कहीं न कहीं उन्हें भावनात्मक टीस तो दे ही रहा है ।

मेरी पीढी के लोगों को यह दुख हमेशा सालता रहेगा कि वह तुम्हारा हिस्सा कभी न बन सके । शायद तुम्हारा अस्तित्व मे आना कुछ विलम्ब से ही हुआ या फिर हमारा इस दुनिया मे आना कुछ पहले । बहरहाल हमारी यादों के भी  लंबे काफिले हैं लेकिन वहां तुम नही हो । काश ऐसा न होता । बहरहाल तुम्हारे चाहने वाले लाखों दोस्तों को एक उम्मीद अभी भी है कि शायद तुम फिर कभी लौटोगे उनकी जिंदगी मे,  बेशक एक नये बदले चेहरे के साथ । इसलिए कभी अलविदा न कहना ।