Monday, 20 July 2015

घाटी मे आतंक का बदलता चेहरा



( एल. एस. बिष्ट ) दिल्ली की राजनीति मे राजनीतिक दलों के बीच नित नये आरापों-प्रत्यारोपों से थोडा अलग हट कर देखें तो घाटी मे आतंक का एक नया चेहरा उभरता दिखाई देने लगा है । रूबिया अपहरण कांड के बाद हिंसा और अलगाव की जिस लहर ने पूरी घाटी को अपने चपेट मे ले लिया था, अब एक बार फिर वही हालात बनते दिखाई दे रहे हैं । अभी तक देश घाटी मे आतंक के जिस चेहरे व तेवर से परिचित रहा है उसमे तेजी से बदलाव आता दिख रहा है । युवाओं की बढती भागीदारी स्प्ष्ट दिखाई देने लगी है । बडी संख्या मे कश्मीरी युवा विरोध प्रदर्शनों मे आने लगे हैं । यही नही, इधर कुछ समय से घाटी के प्रदर्शनों मे इस्लामिक स्टेट और फिलस्तीन के झंडे भी कुछ ज्यादा ही नजर आने लगे हैं । इन झंडों का कुछ समय पहले तक घाटी से कोई रिश्ता नही था ।

इधर हाल मे अमेरिका के विदेश विभाग ने आतंकवाद की अपनी 2014 की जो वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की है इसमे इस्लामिक स्टेट के बढते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है । इस रिपोर्ट मे यह भी बताया गया है कि वैसे अभी तक बहुत कम भारतीय इस आतंकी संगठन से जुडे हैं परंतु भारत मे मुस्लिम आबादी को देखते हुए अधिक संख्या मे लोगों के इस्लामिक स्टेट से जुडने की संभावनाओं से इंकार नही किया जा सकता ।

इस संदर्भ मे देखें तो यहां पाकिस्तान के झंडों का लहराया जाना व पाकिस्तान समर्थक बैनरों का दिखाई देना कोई बडी बात नही रही । लेकिन जिस तरह से अब आए दिन इस्लामिक स्टेट के झंडे दिखाई देने लगे हैं , यह आने वाले खतरे की द्स्तक है । बहुत संभव है आतंक का यह नया चेहरा कश्मीर घाटी के रास्ते देश मे अपनी जडें जमाने की संभावनाओं को तलाशने लगा हो । युवाओं की बढती भागीदारी तो इसी तरफ इशारा कर रही है । अगर ऐसा है तो यह वास्तव मे एक बडा खतरा है जिसे समय रहते समझना और खत्म करना होगा । अगर इन झंडों के प्रदर्शन और उनको लेकर लगाए जाने वाले अलगाववादी नारों पर गंभीरता से ध्यान नही दिया गया तो बहुत संभव है देश के दूसरे हिस्सों मे भी इसका विस्तार दिखाई देने लगे ।
वैसे भी इस संगठन के मुखिया अबु बकर अल बगदादी मुस्लिम युवाओं को दुनिया में इस्लामिक स्टेट का सपना दिखा कर अपनी लडाई में शामिल करते आये हैं । बगदादी अपने मजहबी भाषणों और वीडियो के जरिये मुस्लिम युवाओं को यह समझाने में सफल रहा है कि दुनिया में इस्लाम खतरे मे है और शरीयत के अनुसार एक इस्लामिक देश बनाया जा सकता है जो दुनिया पर राज करे लेकिन इसके लिए एकजुट होकर लडना होगा । कई देशों के युवा उसकी बातों से प्र्भावित हो उसके साथ शामिल हो चुके हैं ।

   अगर सीरियन आब्जर्बेटरी फार ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के आंकडों पर विश्वास करें तो इस संगठ्न के पास लगभग 50 हजार लडाके इरान में और 30 हजार सीरिया में हैं । इनमें अच्छी खासी संख्या विदेशी लडाकों की भी है । इनमें मुख्य रूप से फ्रांस, ब्रिटेन, चेचेन्या आदि देशों के युवा शामिल हैं । यह खतरा भारत मे भी मंडराने लगा है ।
यही नही, यह संगठन अब मासूम बच्चों को अपना मोहरा बनाने लगा है । पांच साल से 14 साल तक के बच्चों को हथियार चलाने का प्रशिक्षण देकर इन्हें लडाई में झोंका जा रहा है । दर-असल बच्चों को शामिल करना इस संगठन की बहुत सोची समझी रणनीति है । यह एक पीढी के मासूम दिलो-दिमाग में अभी से नफरत पैदा कर इस्लाम के लिए लडने वाले जेहादियों की एक खतरनाक फौज तैयार कर रहा है । उसका मकसद आने वाले समय के लिए इन्हें तैयार करना है ।
यही नही, इन बच्चों को लडाई के मोर्चों पर एक ढाल के रूप में भी इस्तेमाल करने की उसकी सोची समझी योजना है । इसलिए जरूरी है कि भारत मे इस खतरे को समय रहते महसूस किया जाए तथा ऐसा न हो इसके लिए कारगर रणनीति बना कर इस आतंकी संगठन के इरादों को पूरा न होने दिया जाए ।


     इधर घाटी मे कुछ आतंकी युवाओं ने आतंक के लिए भारतीय सेना की वर्दी का इस्तेमाल करने की भी योजना को अमल मे लाने का प्रयास शुरू किया है । आतंक का यह चेहरा बेहद डरावना है । इसकी शुरूआत अभी हाल मे ही हुई है । इस तरह कुल मिला कर घाटी मे आतंक का एक नया चेहरा अपनी शक्ल लेने लगा है । इस्लामिक स्टेट और फिलिस्तीन के झडे इस ओर साफ इशारा कर रहे हैं और युवाओं की बढती भागीदारी भी । जरूरी है कि इन प्रयासों को शुरूआती दौर मे ही खत्म कर दिया जाए । अन्यथा एक बार जडे जमा लेने के बाद इसे रोक पाना इतना आसान नही रहेगा ।