Thursday, 6 March 2014

तलाश है एक अदद प्रधानमंत्री की (चुनाव चकल्लस


              

कुछ भी कहिऐ इन आम चुनावों ने फेसबुक का मजा किरकिरा कर दिया है । प्रेमरस में डूबी कविताएं जिन्हें पढ  कर मन कुलांचें भरने लगता था दिखाई देनी बंद हो गई । विरह की आग में जलते गीतों की तपिश भी महसूस नही हो रही । पता नही कहां खो गईं विरह की वेदना । मित्रों की सारी कल्पना शक्ति और उर्जा  चुनाव के घिसे पिटे चुनावी बुलेटिनों तक सीमित हो कर रह गई है । लेकिन तमाम कसरतों के बाबजूद एक अदद प्र्धानमंत्री की तलाश अब भी जारी है ।

मित्रों की लेखनी से उपजे उदगारों के आधार पर जो कुछ निष्कर्ष निकले हैं उंनके अनुसार यह कहा जा सकता है कि चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में सबसे ऊपर के पायदान पर खडे मोदी जी के आलोचकों की संख्या भी कम नही । उनके अनुसार अगर मोदी प्र्धानमंत्री बने तो देश टूट जाएगा । देश मे दंगे ही होते रहेगें । धर्मनिरपेक्षता का तमगा लगाये उनके आलोचक उन्हें ठंडा पानी पी पी कर 'फेकू' , बड्बोला, और साम्प्र्दायिक जैसे तमाम श्ब्दों से सुशोभित कर रहे हैं । और कुछ तो सर्वेक्षण को ही झूट का पुलिन्दा मान रहे हैं ।

अब रही बात हमारे राहुल जी की तो यहां भी ऐसे लोगों की संख्या कम नही जो उनके दलित व कुली प्रेम को महज नौट्की मान रहे हैं और राजनीति में उन्हे 'कच्चा खिलाडी' मान  खारिज भी कर रहे हैं । कुछ तो मानते हैं कि उनमे कूबत ही नही है देश चलाने की ।  वैसे भी राहुल बेचारे सर्वेक्षण के हिसाब से सबसे निच्ले पायदान पर खडे हैं । और उंनके आलोचक वैसे भी पिछ्ले दस वर्षों का हिसाब दिखा रहे हैं ।अब अकेली जान क्या क्या करे ।दल के दूसरे लोग तो मानो पहले से हार मान कर बैठे हों । लेकिन फेसबुक पर मित्र उंनकी दयनीय स्थिती को देख्ते हुए थोडा रहम जरूर कर रहे हैं ।

अब बचे ईमानदारी का आयकन बने केजरीवाल जी । सबसे ज्यादा दुर्गत उन्ही की हो रही है । कोई भगोडा तो कोई बहुरूपिया तो कोई अति महत्वाकांक्षी कह रहा है । उंनके खांटीपन को भी बेबकूफी का लेबल लगा दिया गया है ।जिस झाडू ने सत्ता पर बैठाया उसी झाडू को लेकर अब  लोग उन्हे तलाश रहे हैं कहीं मिल तो जाएं। कम से कम फेसबुक पर मित्रों की पोस्ट पढ् कर तो ऐसा ही लगता है ।  उंनके किए वादों की फेसबुक पर अच्छी पोस्ट्मार्टम भी हो रही है । गुजरात जाकर तो उन्होनें अपनी गत और बिगाड दी । अपना तो बच गए दिल्ली , लखनऊ और इलाहाबाद में साथियों की धुलाई करवा दी ।

अब समझ्ना मुशिकल हो रहा है कि आखिर प्र्धानमंत्री के लायक है कौन । इस देश का कोई प्र्धानमंत्री बनेगा भी कि नही । मित्र किसी दूध के धुले का नाम भी तो नही बता पा रहे हैं जो पूरा ईमानदार , सच्चा , और लायक हो । वह न तो साम्प्र्दायिक हो , न ही नौट्कीबाज और न ही भगोडा बहुरूपिया । और अब अगर मुलायम और बहन जी की तरफ देखें तो कुछ प्र्गतिशील मित्र उनकी जातीय राजनीति के कारण उन्हें भी कच्चा चबाने के लिए बैठे हैं । रही बात बगांल की बहन जी की तो सभी जानते हैं कि एक तो उन्हें " हमार सोनार बांगला " के सिवाय कुछ दिखता नही और दूसरा तुनकमिजाजी इतनी कि कब राष्ट्र्पति जी से भी भिड जाएं, पता नही । दक्षिण की बहन जी का देश प्रेम तो अभी जगजाहिर ही हो गया । प्र्धानमंत्री के हत्यारों को भी रिहा कर सकती हैं ।

फेसबुक पर मित्र तलवारें भांज रहे हैं । युद्ध की स्थिती बनी हुई है । अपने अपने दलों के समर्थन में उठा पटक चल रही है ।  लेकिन सवाल जहां का तहां कि सर्व गुण सम्पन्न,  प्र्धानमंत्री मिलेगा कहां से । कम से कम फेसबुक में तो नही मिल रहा । अब भय सताने लगा है कि कहीं प्र्धानमंत्री भी बाहर से आयात न करना पडे । बहरहाल अगर कहीं मिलें तो हमे भी जरूर बताईगा । चिंता हमे भी है ।

सम्पर्क :
एल.एस.बिष्ट,
11/508, इंदिरा नगर,
लखनऊ – 16
मो. 9450911026